शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

अपनी जिम्मेदारी कब निभाएंगे??

आज तक बचपन से एक ही बात सुनकर बड़े हुए "मुझे गर्व है भारतीय होने पर",यही सोचा और यही फील किया ,पर क्या कभी ये सोचा इस देश के प्रति हमारी भी कोई रेस्पोंसिबिलिटी है। चलिए आज से ही शुरुआत करते हैं ।कुछ विशेष नहीं, सिर्फ थोडा सा नजरिया बदलने की जरुरत है और परिणाम हमारे सामने होंगे। कल बस स्टॉप जाना हुआ,वहा की दयनीय स्तिथि देखकर बहुत दुःख हुआ।

हम भारतीयों की एक आदत है ,हमें बुरी चीज़े देखकर गुस्सा तो बहुत आता है, पर हम उसका दोष किसी न किसी को देकर, खासकर सरकार को देकर वहीं भूल जाते हैं और सोचते है हमारा काम खत्म ।
मानती हूँ सरकार की भी  जिम्मेदारी है,पर  क्या हमारे सहयोग के बिना कुछ मुमकिन है?? क्या हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं?
 जब हमारे शहर कोई मेहमान आता है तब हुम बड़े गर्व से उसे अपने शहर के बारे में बताते है,बड़े तत्पर रहते हैं उसे अपना शहर रूपी घर दिखाने को । तब तो हमें बस यही लगता है की पूरा शहर अपना है तो फिर फ़र्ज़ निभाते वक्त सिर्फ सरकार?? ऐसा क्यों है??
शुरुआत तो करनी होगी वरना  अपनी अगली पीढ़ी को विरासत में क्या देंगे, क्या हम उन्हें एक स्वच्छ वातावरण,सभ्य समाज वाला बेहतर भविष्य नहीं देंगे । जानती  हूँ  आपका जवाब है क्यों नहीं तो फिर सोचिये आप यह कैसे कर सकते हैं। 
कभी रास्ते में कूड़ा फेकते हुए सोचा है सब इसी तरह करेंगे तो आप रोड पे कैसे चल पाएंगे। कभी सरकारी बस ,ट्रेन में मूंगफली के छिलके फेकते हुए सोचा है आप बगल में बैठे अपने नन्हे मासूम को क्या सीख दे रहे हैं। सरकारी बिल्डिंग्स की दीवारों पर थूकते,टॉयलेट करते हुए कभी सोचते है कोई आपके घर की दीवार पर ऐसा करे तो आपको कैसा  लगेगा। नहीं सोचा तो सोचिये और जाग जाइये।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें